Saturday, April 3, 2010

Sunday Message Jesus is The Lamb of God/यीशु परमेश्वर का मेमना है






मैं हमेशा इस बात पर आश्चर्य करती थी कि जिस दिन येशु ने मानवता के किये अपना जीवन बलि चढ़ा दिया उस दिन को लोग गुड

फ्राइडे क्यों कहते है, लेकिन यह मैं तब तक ना समझ सकी जब तक मैं येशु के करीब ना पहुंची और उसकी पुनुरुत्थान की सामर्थ को ना जाना  

आपमें से भी बहुत ऐसे होंगे जो गुड फ्राइडे और रविवार के सच को पूरी तरह से नहीं जानते होंगे ?
क्या आप जानना चाहेंगे ?
दुनिया में सबसे बड़ा चमत्कार येशु का जन्म नहीं है बल्कि उसका मरना और मरे हुओं में से जी उठाना है |
लेकिन ऐसा क्यों हुआ  ?
हमारे और तुम्हारे उद्धार के लिए
पढ़ें रोमियों 5 :12, 19
अतः जिस प्रकार एक मनुष्य के द्वारा पाप ने जगत में प्रवेश किया, तथा पाप के द्वारा मृत्यु आई उसी प्रकार…...., जैसे एक मनुष्य के आज्ञा उलंघन से अनेक पापी ठहराए गए, वैसे ही एक मनुष्य की आज्ञाकारिता से अनेक मनुष्य धर्मी ठहराए जांयेंगे
यीशु परमेश्वर का मेमना कैसे हुआ और गुड फ्राइडे या फसह का पर्व क्या है ?
युहन्ना 1 बताता है कि परमेशवर स्वयं देहधारी हुआ इसका मतलब है कि यीशु पूर्णतया पवित्र था
लुका 2 बताता है कि उसके लिए सराय में कोई जगह ना थी इसलिए उसका जन्म पशुशाला में हुआ इसका मतलब है कि वह जन्म के साथ ही परमेश्वर का मेमना घोषित कर दिया गया था क्योंकि पशु का जन्म सराय में नहीं बल्कि पशुशाला में होता है |
निर्गमन 12  बताता है कि परमेश्वर हमारे पापों के बदले एक निर्दोष मेमने की बलि की डिमांड करता है और निर्दोष के लहू से हमारा छूटकारा था, इसका मतलब है कि यीशु का लहू हमे पूरी तौर से छूटकारा देने में सामर्थ है
युहन्ना 1:29  बताता है कि यीशु परमेश्वर का मेमना है जो जगत का पाप उठा ले जाता है, 
जब हम इन वचनों को पढ़ते है तब पता चलता है कि यीशु का जन्म, मृत्यु और पुनुरुत्थान परमेशवर की अति उत्तम योजना के तहत हुआ|
यहूदी प्रति वर्ष फसह का पर्व मनाते, और मेमने के लहू को अपने दरवाजे की चौखट पर लगते थे ताकि जब पापों के कारण परमेश्वर दंड दे वे इससे बच जाएँ |
जब यीशु ने जेरूसलम में प्रवेश किया लीगों ने होसाना जिसका मतलब है "हमारी रक्षा कर" कह कर उसका स्वागत किया, तब उन्हें ना पता था कि वह ही परमेश्वर का चुना हुआ मेमना है और उनकी रक्षा अवश्य ही करेगा |
दोपहर के तीन बजे के वक्त मेमना बलि किया जाता था यही वह समय था जब यीशु ने क्रूस पर से बोला, "सब ख़तम हुआ और अपने प्राण छोड़ दिए, उसी वक्त मंदिर का पर्दा ऊपर से नीचे तक फट गया, जो इस बात का प्रतीक है कि मानव जाति और परमेश्वर के बीच की दूरी समाप्त हुई क्योंकि यीशु परमेश्वर के निर्दोष मेमने ने अपना रक्त देकर हमारा कर्ज सदैव के लिए चुका दिया |
प्रिय मित्र क्या तुम जानना चाहोगे की जिस वक्त यीशु क्रूस पर अपने प्राण त्याग रहा था, अध्यात्मिक जगत में क्या हो रहा था
तो सुनो-
प्रेरितों के कार्य 2:11 से पता चलता है कि उस स्थान पर ना केवल यहूदी देश के यहूदी थे बल्कि विभिन्न देशों से यहूदी मत को मानने वाले लोग इकठ्ठा थे,
मत्ती 4:1 से पता चलता है कि शैतान यीशु की परीक्षा लेने आया था
मैं आप लीगो को क्रूस के उस दृश्य तक ले जाना चाहती हूँ जहाँ पर हमारी विजय छुपी हुई है
मेरी प्रार्थना है कि पवित्र आत्मा आपकी मदद करे और आप परमेश्वर की योजना को देख पायें
युहन्ना 8:32, कि तुम सत्य जानोगे और सत्य तुम्हें मुक्ती देगा
जिस वक्त यीशु को क्रूस पर लटकाया जा रहा था उस वक्त उसकी मृत्यु के गवाह देश-विदेश से आये लोग थे, शैतान और उसकी तमाम दुष्ट -आत्माएं भी थीं जो यीशु का मज़ाक उड़ाने के लिए नरक से बाहर निकल कर आई थीं|
वहां पर हर बीमारी की, हर तकलीफ की, हर दर्द की, हर मुश्किल की, जिसका नाम है वहां मौजूद थी और उपहास कर रही थी |
शैतान  और उसकी दुष्टात्माएं यीशु की मृत्यु से आनंदित थी और सोच रहीं थी कि वे जीत गयीं, लेकिन वचन ( इफिसियों 1:20-23 ) कहता है कि जिसे उसने (परमेश्वर ने ) मसीह में पूरा किया जब उसने ( परमेश्वर ने ) उसे (यीशु को ) मरे हुओं में से जिला कर अपने दाहिने ओर स्वर्गीय स्थानों में अर्थात सब प्रकार की प्रधानता, अधिकार सामर्थ और प्रभुता के तथा प्रत्येक नाम के ऊपर जो ना केवल इस युग में परन्तु आने वाले युग में भी लिया जाएगा बैठाया | उसने सब कुछ उसके ( यीशु के ) पैरो तले कर दिया और उसे सब वस्तुओं पर शिरोमणि ठहराकर कलीसिया को दे दिया |
क्या तुम समझ सकते हो कि परमेश्वर ने यीशु के पुनुरुत्थान के जरिये हमें भी उस सामर्थ से भर दिया है ?
क्या अभी भी हम यीशु पर अविश्वास करेंगे ?
जबकि हम जानते है कि मृत्यु उसे ना रोक सकी
कब्र उसे ना खा सकी, मत्ती 28 में स्वर्गदूतों ने मरियम और मगद्नीलीनी से कहा कि वह यहाँ नहीं है
यीशु ने मृत्यु पर विजय पा ली है और चूँकि हम उसमें है तो हमने भी मृत्यु पर विजय पा ली है
अगर कोई ताकत है जो आपको पुनुरुत्थान की सामर्थ पाने से रोक सकती है वह है आपका अविश्वास और दूसरों को क्षमा ना करना
क्या यह जानने के बाद भी आप अपने अपराधों की माफ़ी ना मांगेंगे और दूसरों के अपराफ्हों को क्षमा ना करेंगे |
जो दंड आप और में भुगतने जा रहें थे वह यीशु ने परमेश्वर का मेमना बन कर और फिर मरे हुए में से जी कर उठा लिया है फिर देरी क्यों अपने स्थान पर खड़ें हों और दूसरो को माफ़ कर दें ताकि परमेश्वर हमें माफ़ कर सके
आप इस वक्त कैसी भी स्थिति में क्यों ना हो, पुनुरुत्थान की सामर्थ यहीं और आपके पास है
अपने जीवन के मृत्य तथ्यों में यीशु के पुनुरुत्थान की आत्मा छोडो
डाक्टर ने कह दिया है सब ख़त्म अब कुछ नहीं हो सकता, पर यीशु कह रहा है कि असंभव को संभव करने वाला मैं हूँ, निर्बल को बल देने वाला मैं हूँ, संसार के अंत तक साथ रहने वाला मैं हूँ |
इसलिए परमेश्वर पर भरोसा रखो और अपने जीवन की परिस्थितियों में पुनुरुत्थान की सामर्थ बोलो
Happy Resurrection Day to All of You/ आप सबको पुनुरुत्थान की शुभकामनाएं

No comments:

Post a Comment